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Monday, September 18, 2023

"एक चेहरे से उतरती हैं रोज नक़ाबे कितनी" | हिंदी शायरी


एक चेहरे से उतरती हैं रोज नक़ाबे कितनी ,
कितने लोग हमें एक शख्स में मिल जाते है ,
वक़्त बदलेगा तो इस बार पूछेंगे उससे हम ,
तुम बदलते हो तो क्यों लोग बदल जाते है ।


 

"दुआएं मन्नते रोशन दीया कबूल करें" | हिंदी शायरी (जम्मुल काज़मी)

  दुआएं मन्नते रोशन दीया कबूल करें, वो आए मेरे और अश्क-ए-वफा कबूल करें, वो आईने से अगर मुतमईन नहीं है तो फिर, हमारी आंखें बतौर आईना कबूल करे...